मथुरा,संस्कृति यूनिवर्सिटी के साइंस क्लब और साइंस इनोवेशन क्लब द्वारा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती, विश्व छात्र दिवस और राष्ट्रीय नवाचार दिवस के अवसर पर 'इग्नाइट 2026' का भव्य आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “विकसित भारत @2047 के लिए कलाम का विजन” रहा।

मुख्य अतिथि और डीआरडीओ के वैज्ञानिक भक्तवत्सल कुमार सिंह ने छात्रों को प्रेरित करते हुए डॉ. कलाम का प्रसिद्ध विचार साझा किया कि "सपने वह नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, बल्कि सपने वह हैं जो हमें सोने नहीं देते। उन्होंने स्टूडेंट शब्द का एक विशेष अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि एस का मतलब है अध्ययन और ज्ञान प्राप्त करना, टी मतलब ईमानदारी और सत्यनिष्ठा, यू से मतलब महान विचार और अच्छे चरित्र वाला, डी मतलब नए विचारों और प्रक्रियाओं को लाने वाला, ई मतलब विचारों को धरातल पर उतारने वाला, एन मतलब मौलिकता और नए डिजाइन पेश करने वाला और अंत में टी का मतलब है विश्वसनीयता बनाए रखने वाला। उन्होंने रक्षा और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का उदाहरण देते हुए बताया कि आज के समय में फिजिकल ट्रायल (भौतिक परीक्षण) में समय बर्बाद करने के बजाय त्रि आयामी मॉडलिंग और सिमुलेशन टेस्टिंग का उपयोग किया जाता है। इससे बिना वास्तविक उत्पाद बनाए ही दुर्घटनाओं और विनिर्माण की कमियों को पहले ही जांचा जा सकता है, जिससे जोखिम कम हो जाता है।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डीआरडीओ के सीनियर साइंटिस्ट-एफ श्री भक्तवत्सल कुमार सिंह, कुलपति डॉ. एम.बी. चेट्टी, डीन छात्र कल्याण डॉ. डी.एस. तोमर और फैकल्टी कोऑर्डिनेटर डॉ. शिवम कुलश्रेष्ठ द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। स्वागत भाषण में शिवम कुलश्रेष्ठ ने डॉ. कलाम और विक्रम साराभाई के सीमित संसाधनों में अंतरिक्ष कार्यक्रमों के योगदान को याद किया।

इस मौके पर कार्यक्रम में उपस्थित संस्कृति विवि के कुलपति डॉ. एम.बी. चेट्टी ने साल 2011 में डॉ. कलाम के साथ बिताए अपने पलों को याद किया। उन्होंने बताया कि डॉ. कलाम ने व्याख्यान के लिए कोई पैसा या भोजन स्वीकार नहीं किया, जो उनकी विनम्रता को दर्शाता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि पैसा चोरी हो सकता है लेकिन ज्ञान हमेशा साथ रहता है। उन्होंने छात्रों को संदेश दिया, “सपने तब तक देखो जब तक वे हकीकत न बन जाएं।”

डीन छात्र कल्याण डॉ. डी.एस. तोमर ने डॉ. कलाम के बचपन के संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि कैसे वे भारी बारिश में भी समय के पाबंद रहकर अखबार बांटते थे। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा था कि साधनों के साथ नहीं, आदर्शों के साथ चलें। उन्होंने छात्र परिषद से डॉ. कलाम के नैतिक मूल्यों पर चलने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों के बीच पीपीटी प्रेजेंटेशन और "मानव कल्याण में एआई " विषय पर एक वाद-विवाद  प्रतियोगिता आयोजित की गई। डॉ. सुनील कुमार, डॉ. नीलम, डॉ. डी. वाधवा और डॉ. अखिलेश कुमार मौर्य ने जज की भूमिका निभाई। प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान अपर्णा और ललितेश (फार्मेसी) ने जीता उनके प्रजेंटेशन का विषय था, नैनोटेक्नोलॉजी, द्वितीय स्थान नितिन सिंघल (फार्मेसी) विषय था आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तृतीय स्थान ग्रेसी मिश्रा (बीएससी फोरेंसिक बायोटेक्नोलॉजी) । उन्होंने डिजाइनिंग द फ्यूचर पर अपना प्रजेंटेशन दिया। 

वाद-विवाद (डिबेट) प्रतियोगिता में नितिन सिंघल (फार्मेसी) और सृष्टि चौधरी (बीपीटी) को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया गया। कार्यक्रम के अंत में ललितेश ने धन्यवाद ज्ञापित किया और विजेताओं के नामों की घोषणा की। कार्यक्रम का संचालन बीएससी बायोटेक्नोलॉजी द्वितीय वर्ष की छात्रा रागिनी और दिव्यांशी बघेल ने किया।