मथुरा। मथुरा रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों ने मुस्तैदी और मानवीय संवेदना की एक अनूठी मिसाल पेश की है। रात्रि गश्त के दौरान प्लेटफार्म नंबर 01 पर अपनों से बिछड़कर सहमी खड़ी एक 3 वर्षीय मासूम बच्ची को आरपीएफ की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज कुछ ही घंटों में सुरक्षित उसके परिजनों को सौंप दिया।
डरी और सहमी हालत में मिली थी मासूम
जानकारी के अनुसार, मथुरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 01 पर रात्रि में अपराध रोकथाम ड्यूटी में तैनात आरपीएफ के उप निरीक्षक सुजीत सिंह चंदेल और 'मेरी सहेली' टीम की महिला आरक्षक मीनू कुमारी गश्त पर थे। इसी दौरान उनकी नजर एक छोटी बच्ची पर पड़ी, जो बेहद डरी, सहमी और गुमसुम हालत में अकेली खड़ी थी। बच्ची की उम्र करीब 3 वर्ष थी और उसके आसपास उसका कोई रोने-धोने वाला या देखभाल करने वाला मौजूद नहीं था।
लाउड हेलर से उद्घोषणा कर खोजे परिजन
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप निरीक्षक सुजीत सिंह चंदेल ने बिना वक्त गंवाए त्वरित कार्रवाई शुरू की। उन्होंने तुरंत लाउड हेलर (माइक) संभाला और स्टेशन परिसर व प्लेटफार्मों पर बच्ची के हुलिए की घोषणा (अनाउंसमेंट) करनी शुरू कर दी। आरपीएफ की यह कोशिश रंग लाई और कुछ ही देर में बच्ची को ढूंढते हुए उसके परेशान परिजन वहां पहुंच गए।

बस्ती जिले की रहने वाली है बच्ची
आरपीएफ टीम के सामने जब बच्ची अपनी माँ से मिली, तो उसकी आंखों में सुरक्षा का भाव आ गया। बच्ची की माँ ने उसकी पहचान अनयाखान (उम्र 3 वर्ष), पुत्री शाहिद खान के रूप में की। उन्होंने बताया कि वे उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम गुड़िया (पोस्ट गांधीनगर) के निवासी हैं और यात्रा के दौरान बच्ची अचानक उनसे अलग हो गई थी।
परिजनों ने जताया आभार
अपनी लाडली को सुरक्षित वापस पाकर माँ की आंखों से आंसू छलक आए। बच्ची के परिजनों ने उप निरीक्षक सुजीत सिंह चंदेल, महिला आरक्षक मीनू कुमारी और पूरी आरपीएफ टीम का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और बच्ची के परिजनों ने संकट के समय देवदूत बनकर मदद करने वाली मथुरा जंक्शन रेलवे सुरक्षा बल की इस त्वरित कार्रवाई की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
