रिपोर्ट - धीरेन्द्र सिंह 

आज ब्रजभूमि ही नहीं, बल्कि पूरा सनातन समाज गहरे शोक में डूबा हुआ है। ब्रज की माटी को अपने प्राणों से ज्यादा प्यार करने वाले, यमुना मैया के अनन्य भक्त और राधा रानी की लाडली नगरी बरसाना के महान विरक्त संत श्रद्धेय रमेश बाबा 90 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हो गए हैं।

उनके जाने से ब्रज ने न केवल अपना एक महान संत खोया है, बल्कि उस रक्षक को भी खो दिया है जिसने जीवन के आखिरी सांस तक ब्रज के पर्वतों, वनों और पवित्र यमुना की रक्षा के लिए संघर्ष किया, रमेश बाबा सिर्फ एक संत नहीं, बल्कि ब्रज की संस्कृति और पर्यावरण के जीवंत प्रतीक थे। 90 वर्ष की इस लंबी जीवन यात्रा में उन्होंने वैराग्य का वह उच्चतम आदर्श प्रस्तुत किया, जो सदियों तक याद रखा जाएगा। बरसाना के माताजी गौशाला के माध्यम से उन्होंने हजारों निराश्रित गायों की सेवा की और गोवंश संरक्षण की एक नई अलख जगाई।

उनका पूरा जीवन राधा-कृष्ण की भक्ति और ब्रज के पर्यावरण को समर्पित रहा। यमुना शुद्धिकरण आंदोलन हो या ब्रज के प्राचीन पर्वतों को खनन माफियाओं से बचाने की लड़ाई, रमेश बाबा हमेशा अग्रिम मोर्चे पर डटे रहे। उनके एक आह्वान पर लाखों ब्रजवासी और श्रद्धालु एकजुट हो जाते थे, बाबा का जाना ब्रज के इतिहास के एक युग का अंत है। उन्होंने हमें सिखाया कि भक्ति सिर्फ माला जपना नहीं, बल्कि अपनी प्रकृति और गौमाता की सेवा करना है।

आज उनके ब्रह्मलीन होने की खबर से बरसाना समेत पूरे मथुरा-वृंदावन में शोक की लहर है। संत समाज और देश-विदेश से उनके लाखों अनुयायी बाबा को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। ब्रजभूमि के इस सच्चे रक्षक, परम तपस्वी रमेश बाबा के चरणों में हमारा भी कोटि-कोटि नमन।