रिपोर्ट - धीरेन्द्र सिंह
धार्मिक नगरी मथुरा में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों को रेलवे की बड़ी लापरवाही का सामना करना पड़ रहा है। मथुरा जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर स्थित वीआईपी गेट के पास यात्रियों के बैठने के लिए कुर्सियों का कोई इंतजाम नहीं है। अधिकारियों की घोर उदासीनता के कारण यात्री स्टेशन परिसर में जमीन पर और रेलिंग के सहारे बैठने को मजबूर हैं।

ये तस्वीर देश के सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से एक, मथुरा जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 8 की हैं। कहने को तो यह वीआईपी गेट के पास का इलाका है, लेकिन यहाँ आम यात्रियों के लिए सुविधाएं बिल्कुल थर्ड क्लास हैं। इस पूरे परिसर में यात्रियों के बैठने के लिए एक भी कुर्सी या बेंच उपलब्ध नहीं है। रेलवे प्रशासन के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे यात्री फर्श पर चादर बिछाकर बैठने को मजबूर हैं। घंटों ट्रेन का इंतजार करने वाले मुसाफिरों के पास जमीन पर बैठने या लोहे की रेलिंग के सहारे खड़े रहने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। वहीं जब इस संबंध में यात्रियों से बात की गई तो एक महिला यात्री ने बताया कि वह पिछले दो घंटे से ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं, यहाँ बैठने के लिए एक भी कुर्सी नहीं है, पैरों में दर्द हो रहा है, इसलिए जमीन पर ही बैठना पड़ा, वीआईपी गेट के पास ऐसा हाल है, तो बाकी जगह क्या होगा, वहीं दूसरे बुजुर्ग यात्री ने कहाकि रेलवे टिकट के दाम तो बढ़ा रहा है, लेकिन सुविधाएं शून्य हैं। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यहाँ खड़े रहना भी दूभर हो रहा है। अधिकारियों को हमारी कोई चिंता नहीं है।

इस अव्यवस्था का सबसे ज्यादा खामियाजा महिला, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। मथुरा जैसे संवेदनशील और व्यस्त स्टेशन पर, जहाँ हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, वहाँ बुनियादी सुविधाओं का ऐसा अभाव रेलवे अधिकारियों की उदासीनता को साफ बयां करता है। करोड़ों का राजस्व देने वाले इस स्टेशन पर यात्रियों को फर्श पर बैठकर अपनी ट्रेन का इंतजार करना पड़ रहा है। मथुरा जंक्शन को वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने के दावे तो खूब किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत प्लेटफॉर्म नंबर 8 के इसी वीआईपी गेट के पास दम तोड़ देती है। जहाँ एक तरफ वीआईपी लोगों के लिए खास इंतजाम हैं, वहीं आम जनता इस चिलचिलाती गर्मी और उमस में फर्श पर बैठने को मजबूर है। सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस बदहाली पर क्यों नहीं पड़ती और कब तक यात्री इस उदासीनता का शिकार होते रहेंगे, इस रिपोर्ट को देखने के बाद उम्मीद है कि कुंभकर्णी नींद में सो रहा रेलवे प्रशासन जागेगा और प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर यात्रियों के बैठने के लिए जल्द से जल्द कुर्सियों की व्यवस्था की जाएगी। इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।
