उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी अभियान "ऑपरेशन कन्विक्शन" के तहत मथुरा पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। मथुरा न्यायालय ने युवक को बहला-फुसलाकर ले जाने, उसकी हत्या करने और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव जलाने के सनसनीखेज मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने तीनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास और 12-12 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।
यह पूरा मामला मथुरा के थाना कोतवाली क्षेत्र का है, जहां साल 2017 में मु0अ0सं0 949/2017 धारा 302, 34, 201 और 120बी भादवि के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। वादिया के पुत्र को घर से बहला-फुसलाकर ले जाया गया था, जिसके बाद उसकी निर्मम हत्या कर सबूत मिटाने के लिए शव को जला दिया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस महानिदेशक आगरा जोन, पुलिस उपमहानिरीक्षक आगरा परिक्षेत्र और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा के निरंतर मार्गदर्शन में मथुरा पुलिस व लोक अभियोजक ने अदालत में मजबूत और प्रभावी पैरवी की।
माननीय न्यायालय एडीजे-05/स्पेशल गैंगस्टर एक्ट मथुरा ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर तीनों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई:
- दोषी 1: विक्की उर्फ मुन्नी (पुत्र पप्पू सैनी, निवासी सप्त ऋषि नगर प्यारे का बगीचा, थाना कोतवाली)
- दोषी 2: गोपाल चतुर्वेदी (पुत्र रमाकान्त चतुर्वेदी, निवासी सप्त ऋषि नगर ध्रुव घाट, थाना कोतवाली)
- दोषी 3: बाबू सैनी उर्फ जयप्रकाश (पुत्र राधेश्याम, निवासी किशन टीला भैंस बहोरा, थाना कोतवाली)
सजा का विवरण:
- कारावास: तीनों दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास (Rigorous Life Imprisonment)।
- अर्थदंड: प्रत्येक दोषी पर 12-12 हजार रुपये का जुर्माना।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, "ऑपरेशन कन्विक्शन" के तहत जघन्य अपराधों में त्वरित व गुणवत्तापूर्ण विवेचना और प्रभावी पैरवी के जरिए अपराधियों को सख्त सजा दिलाना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
