रिपोर्ट - धीरेन्द्र सिंह
भारतीय सिनेमा के सबसे सशक्त और बेबाक अभिनेताओं में शुमार नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। आज सुबह 8 अक्टूबर को 75 साल की उम्र में उन्होंने गोवा में अपनी अंतिम सांस ली। इस खबर के सामने आने के बाद से ही पूरे बॉलीवुड और देश भर में शोक की लहर दौड़ गई है। मिली जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर पर अचानक बेहोश पाए गए थे। उन्हें तुरंत पणजी के मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें बहुत ही गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) देकर उन्हें होश में लाने और रिवाइव करने की हर संभव कोशिश की, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं हुई और सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चूंकि यह मामला अचानक मौत का है, इसलिए पुलिस ने मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया है और पोस्टमार्टम के बाद ही शव परिवार को सौंपा जाएगा।
नाना पाटेकर का जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं है, बल्कि अभिनय के एक पूरे स्कूल का बंद हो जाना है। 'विश्वनाथ पाटेकर' से 'नाना' बनने का उनका यह सफर किसी मिसाल से कम नहीं था। आइए नजर डालते हैं उनके 'गमन' से शुरू हुए और 'वेलकम' तक फैले इस शानदार फिल्मी सफर पर। साल 1978 में फिल्म 'गमन' से अपने अभिनय की शुरुआत करने वाले नाना पाटेकर ने बहुत ही कम समय में हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी एक अलग ही लकीर खींच दी थी। अपनी कड़क आवाज़, डायलॉग डिलीवरी का अनोखा अंदाज़ और नेचुरल एक्टिंग के दम पर उन्होंने दर्शकों के दिलों पर राज किया।
• क्रांतिवीर का वो आक्रोश: फिल्म 'क्रांतिवीर' (1994) में उनका फांसी के तख्ते वाला वो आखिरी मोनोलॉग आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देता है। इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड से भी नवाजा गया था।
• परिंदा की क्रूरता: 'परिंदा' फिल्म में विलेन 'अन्ना' के किरदार में उनकी खामोश क्रूरता ने विलेन की परिभाषा बदल कर रख दी।
• तिरंगा और अंगार का जलवा: राजकुमार साहब के साथ 'तिरंगा' में उनका बेबाक अंदाज़ और 'अंगार' फिल्म के लिए मिला उनका नेशनल अवॉर्ड उनके शानदार काम की गवाही देते हैं।
• कॉमेडी में भी लोहा मनवाया: सिर्फ संजीदा या कड़क रोल ही नहीं, बल्कि 'वेलकम' फिल्म के 'उदय शेट्टी' बनकर नाना ने जो कॉमेडी की, उसने साबित कर दिया कि वो हर जॉनर के उस्ताद थे।
• डायरेक्शन का हुनर: उन्होंने सिर्फ कैमरे के आगे ही नहीं, बल्कि पीछे रहकर भी फिल्म 'प्रहार: द फाइनल अटैक' जैसी बेहतरीन फिल्म का निर्देशन किया।
नाना सिर्फ पर्दे के ही नायक नहीं थे, बल्कि असल जिंदगी में भी उन्होंने किसानों की मदद के लिए 'नाम फाउंडेशन' की शुरुआत की और करोड़ों रुपये दान किए। अपनी सादगी और सीधे स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले नाना आज करोड़ों फैंस की आंखों में आंसू छोड़कर चले गए हैं। नाना पाटेकर का यह अचानक जाना सिनेमा जगत के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा। D&G News की तरफ से दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर को भावभीनी श्रद्धांजलि
